Thursday, April 3, 2008

मैं शायर खान बनना चाहता हूं

हमेशा से ये ख्याल मेरे दिल को सताता रहा है,
कि मैं कैसा इंसान बनना चाहता हूं |

कोई डॉक्टर , कोई इंजिनियर , और कोई कहता है,
मैं किसान बनना चाहता हूं |

कोई कहता है , कोई सीमा नही मेरी ख्वाहिशों कि,
मैं तो भागवान बनना चाहता हूं |

नीचे कुछ lines लिखीं हैं मेरे बारे में ,
कि मैं कैसा इंसान बनना चाहता हूं |

बचपन में चढा था cricket का बुखार कभी ,
सोचता था, मैं इरफान बनना चाहता हूं |

ये तो बात थी किस्मत की और थोड़ा अपना भी ज़ोर न चला ,
वरना हमने भी दिया होता पुरी दुनिया को हिला ।

क्यों करें शिकवा किसी से , कहे की गिला ,
आगे चल कर देखते हैं, मुझे जिंदगी से और क्या क्या मिला |

रुख किया gym की तरफ़ , खूब किया work-out, बनूँगा John Abraham जैसा ,
सोचा , लड़कियां होंगी first sight मे ही knock-out |

Exams आए सर पे , डांट पड़ी घर पे |

घर वाले थे परेशान , कहा बेटा बस फोकट का खाते हो ,
कुछ करो लाइफ मे , क्या रिक्शा वाला बनना चाहते हो ?

तभी मैंने किया फ़ैसला , पढूंगा-लिखूंगा , खूब नाम कमाऊँगा ,
क्यूंकि मैं खानदान की शान बनना चाहता हूं |

हो गया था selection JEE मे , घर वाले भी थे खुश ,
पढ़ -लिख लेगा बेटा हमारा भी , बनेगा George Bush |

रैगिंग मे गाना गवाया seniors ने , दोस्तों ने कहा कितना अच्छा गाते हो ,
इतना अच्छा गला दिया है भागवान ने , गायकी मे क्यों नही हाथ आज़माते हो ?

बस फिर क्या था , खोला गला मैंने, करने लगा रियास , और कह दिया सबसे मैंने ,
सुन लो ऐ दुनिया वालों , मैं singer शान बनना चाहता हूं |

Hostel मे मच गया हाहाकार , लोगों ने कहा बंद करो ये अत्याचार ,
गाना ही गाना है तो ट्रेन या मन्दिर मे जाओ , मिल जायेगी भीख हज़ार ।

बस टूट चुका था मेरा दिल , लिखने लगा मैं शेर ,
लोगों को आया मज़ा , अच्छे - अच्छे शायर हुए मेरे आगे ढेर |

अब तो बस के दिल में सबके , सबके होठों की मुस्कान बनना चाहता हूं,
हाँ दोस्तों ये है मेरा आखिरी फ़ैसला , मैं शायर खान बनना चाहता हूं | :-)

Wednesday, April 2, 2008

टूटे दिल की सदा

तमन्ना नही थी किसी खज़ाने की ,
पल भर मे ज़िंदगी बदल गई इस दीवाने की ,
मुझे इश्क की ऐसी सज़ा दी किसी ने
कि वजह भी न छोड़ी मुस्कुराने की ।

फ़िर भी मुस्कुरा रहा हूँ , ये कैसी अदा है ,
दूर कहीं से आ रही , ये टूटे दिल कि सदा है |
दर्द कम करने को रो भी नही सकता ये आशिक
मोहब्बत करने की मिली ये कैसी सज़ा है |

किसी का प्यार मुझे हमेशा सताएगा ,
और ये दर्द भी बहुत तडपाएगा |
फ़िर भी उनकी खुशी के लिए,
ये दीवाना हमेशा मुस्कुराएगा |

आसमान मे कोई टूटता सितारा देखता हूँ ,
मजधार मे खड़ा होकर सागर का किनारा देखता हूँ ,
ये क्या सितम ढाया कुदरत ने इस दिल पे , कि
अपनी ही बर्बादी का नज़ारा देखता हूँ ।

दिल ज़ख्मों से छलनी होगा , पर आंखों मे नमी होगी ,
मिलेगा हमसा आशिक कहीं , ऐसी कोई ज़मीं होगी ,
भूल पाएंगे , और मिल भी पाएंगे शायद कभी
पर उनके लिए हमारे प्यार मे कोई कमी होगी .

मेरे कुछ शेर


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