तमन्ना नही थी किसी खज़ाने की ,
पल भर मे ज़िंदगी बदल गई इस दीवाने की ,
मुझे इश्क की ऐसी सज़ा दी किसी ने
कि वजह भी न छोड़ी मुस्कुराने की ।
फ़िर भी मुस्कुरा रहा हूँ , ये कैसी अदा है ,
दूर कहीं से आ रही , ये टूटे दिल कि सदा है |
दर्द कम करने को रो भी नही सकता ये आशिक
मोहब्बत करने की मिली ये कैसी सज़ा है |
किसी का प्यार मुझे हमेशा सताएगा ,
और ये दर्द भी बहुत तडपाएगा |
फ़िर भी उनकी खुशी के लिए,
ये दीवाना हमेशा मुस्कुराएगा |
आसमान मे कोई टूटता सितारा देखता हूँ ,
मजधार मे खड़ा होकर सागर का किनारा देखता हूँ ,
ये क्या सितम ढाया कुदरत ने इस दिल पे , कि
अपनी ही बर्बादी का नज़ारा देखता हूँ ।
दिल ज़ख्मों से छलनी होगा , पर आंखों मे नमी न होगी ,
मिलेगा हमसा आशिक कहीं , ऐसी कोई ज़मीं न होगी ,
भूल न पाएंगे , और न मिल भी पाएंगे शायद कभी
पर उनके लिए हमारे प्यार मे कोई कमी न होगी .
Wednesday, April 2, 2008
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